संस्कृति और विरासत

संस्कृति और त्योहार:-

प्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल (४ अक्टूबर, १८८४- २ फरवरी, १९४१) हिन्दी आलोचक, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे। प्रसिद्ध कवि और दार्शनिक महात्मा कबीर बस्ती जिले में मगहर में रहते थे जो वर्तमान में संत कबीर नगर जिला में अता हैं। जिले के निवासियों द्वरा नव-दुर्गा, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी, शिवरात्रि, दीपावली, ईद-उल-फितर, ईद-उज़-ज़ुहा, मोहर्रम, दशहरा और होली जैसे त्योहारों को धूमधाम से मनाया जाता हैं|

नव-दुर्गा पूजा

शरद ऋतू में नव दुर्गा पूजा के दौरान 15 दिन शहर की सभी सड़क फैंसी बिजली के प्रकाश और सुंदर नव दुर्गा मूर्त्ति के साथ सजाए जाते हैं। शहर के लोगों इस अवसर को बड़ी धूमधाम और खुशी के साथ मनाते हैं, ग्रामीण जन भी भाग लेते हैं| जिला प्रशासन इस अवधि के दौरान सभी कानून व्यवस्था करता है।

कंवाड़िया मेला:-

यह मेला प्रत्येक वर्ष अगस्त के महीने के द्वुतीय मंगलवार को मनाया जाता है | शिव भक्त बड़ी तादात में अयोध्या से सरयू नदी का जल लेकर भदेश्वरनाथ शिव मंदिर में पूजा के लिए आते हैं| इस दौरान NH-28 राज मार्ग अवरूद्ध हो जाता हैं, पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखती हैं|

भाषा:-

बस्ती जनपद में मुख्य रूप से अवधी और भोजपुरी बोली जाती हैं। अधिकांश लोग हिंदी में पढ़ और लिख सकते हैं|

खाद्य:-

लोगों के मुख्य भोजन में रोटी (गेहूं), चावल, दल (अरहर) और मौसमी सब्जियां और फलों हैं|

कपड़ों:-

ग्रामीण इलाकों में बुजुर्ग ज्यादातर बुजुर्ग लोग कुर्ता, धोती पहनते हैं और महिलाओं ने साड़ी और बलाऊज पहनती हैं| और नवयुवक शर्ट और पैंट पहनते हैं, लड़कियों को सलवार का शूट पहनती हैं |